मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

पता नहीं भाई ये कैसा  सम्बन्ध है आपका  और मेरा ,जो आपके हर गलत कदमो की आहट ,बात करने की वो जानी -पहचानी सी फुसफुसाहट ,कान न भी लगाऊ तब भी सुनाई दें ही जाती है ……।जानती हूँ आप अब भी कही और इनवॉल्व है ……।  मन कसैला हो जाता है की अब भी कैसे आप ? पर फिर भी आप घर जरुर लौटना मेरी वही पुराने भाई बनकर ! माफ़ करना भाई ,घर से अभी-अभी लौटी हूँ तो मन बड़ा भारी है.…। मुझे घर नहीं आना चाहिए था कम से काम ये भरम तो कुछ समय बना रहता ,जो आपने  कहा था "कि  अब ऐसा कुछ नहीं है मैं कुछ गलत नहीं कर  रहा हूँ....................... सामान बांध तो लिया है मैंने यहाँ से लेकिन इतना तो बताओ भाई ,कहा रहते है वो लोग जो कहीं के नहीं रहते ???????

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